Marwari Vikash Trust

मारवाड़ी विकाश ट्रस्ट
संकल्प से सिद्धि तक
एमभीटी गीता

सीए श्री अनिल मुकिम, अध्यक्ष
द्वारा सभी सम्मानित सदस्यगण जानकारी हेतु

प्रथम अध्याय – स्थापना और संकल्प

फरवरी 2019 की शुभ बेला में, इक्यावन दीप जले थे,
इक्यावन मन, इक्यावन सपने, एक सूत्र में ढले थे।
ना पद की चाह थी, ना यश की इच्छा, ना कोई अपना मान था,
बस समाज के विकास का, मन में एक अरमान था।
समानता की नींव रखी, पारदर्शिता का दीप जला, स्लोगन था
“ अर्थ बचेगा तो समाज बचेगा ”, यह संकल्प सभी हृदय में पला।
धर्मशाला की सोच बदलकर, रिजॉर्ट निर्माण का बीज बोया,
सेवा, संगठन और समर्पण से, समाज का भविष्य संजोया।

अर्थार्त

फरवरी 2019 में मारवाड़ी विकास ट्रस्ट का गठन 51 सदस्यों द्वारा एक ट्रस्ट डीड के माध्यम से किया गया। स्थापना का मूल उद्देश्य था – समाज में समानता, पारदर्शिता एवं सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ते हुए सामाजिक विकास और सामूहिक खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करना। समाज में बढ़ते फिजूल खर्च को नियंत्रित करना तथा सामाजिक आयोजनों को व्यवस्थित एवं सुलभ बनाने की सोच के साथ यह संकल्प लिया गया कि पारंपरिक धर्मशाला की अवधारणा को बदलते हुए समय के अनुरूप एक सुंदर एवं आधुनिक रिजॉर्ट परियोजना के माध्यम से नई दिशा दी जाए। इसी सोच को एक सूत्र में व्यक्त किया गया
“ अर्थ बचेगा तो समाज बचेगा।”
समाज के सभी सदस्यों ने इस विचार को एक स्वर से स्वीकार किया और आज यही ट्रस्ट लगभग 585 सदस्यों के साथ भारतवर्ष के प्रमुख सामाजिक ट्रस्टों में अपना स्थान बना चुका है। 51 ट्रस्टियों की एकीकृत ट्रस्ट डीड अपने आप में सामाजिक एकता का एक अनूठा उदाहरण है। सामूहिक विश्वास, समर्पण और सामाजिक विकास के संकल्प के साथ यह अध्याय सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ।

द्वितीय अध्याय – भूमि संघर्ष और विजय

धरती खोजी गाँव-नगर में, एक नहीं सौ बार गये,
एक सौ सोलह राहों से होकर, फिर हम उस द्वार गये।
राज आंगन की पावन धरती, जैसे भाग्य पुकार रहा,
भगवत कृपा का हाथ पकड़कर, समाज नया आकार बना रहा।
जब सभा में यह स्वर उठा था — “अब यह सपना टूटेगा”,
तभी कहीं भीतर भगवान बोले — “नहीं, यह दीप न रूठेगा।”
सज्जन, चेतन, लोकेश बनकर, समाज साथ में खड़ा हुआ,
विश्वासों की पूँजी से फिर, संकल्पों का वृक्ष बड़ा हुआ।

अर्थार्त

परियोजना हेतु उपयुक्त भूमि की खोज में अनेक प्रयास किए गए। लगभग 116 स्थानों के निरीक्षण के पश्चात भगवान की कृपा से 117वीं भूमि – राज आंगन परिसर का चयन किया गया। भूमि का कुल मूल्य लगभग ₹2.70 करोड़ तथा रजिस्ट्रेशन एवं म्यूटेशन सहित कुल बजट लगभग ₹3 करोड़ निर्धारित हुआ। उस समय ट्रस्ट के पास केवल ₹51 लाख की निधि थी और जमीन भुगतान की समय सीमा 30.09.2022 तक निर्धारित थी। 16.09.2022 को अग्रसेन भवन, हीरापुर में आयोजित आम सभा में संसाधनों के अभाव के कारण परियोजना स्थगित करने का निर्णय लिया गया। किन्तु उसी रात्रि एक नई प्रेरणा के साथ अनिल मुकिम ने यह संकल्प लिया गया -“यह परियोजना रद्द नहीं होगी।” इसके उपरांत 104 डिसमिल भूमि में से 36 डिसमिल भूमि तीन सदस्यों – सज्जन खरकिया, चेतन गोयंका एवं लोकेश जालान को अस्थायी रूप से हस्तांतरित कर एक करोङ पचास लाख का प्रस्ताव रखा गया, जिसे तत्काल तीनो सदस्य द्वारा स्वीकार किया गया । इस व्यवस्था से प्राप्त लगभग ₹1.50 करोड़ की राशि भूमि स्वामी रितेश शर्मा को अदा की गई और भूमि क्रय प्रक्रिया पूर्ण होने की राह पर आ गयी । इसके बाद समाज का विश्वास निरंतर बढ़ता गया, ट्रस्टियों की संख्या बढ़कर लगभग 300 हुई और प्राप्त राशि से तीनो सदस्य एवम रितेश शर्मा का पूरा भुगतान कर अंततः भूमि ट्रस्ट के नाम वापस स्थानांतरित कर म्यूटेशन कराया गया। तीनो सदस्य ने ट्रस्ट से कुछ समय लगभग तीन महीने के लिए दी गयी राशि पर पूर्ववत निर्धारित ब्याज को छोडने का एलान कर ट्रस्ट को मदद की और इसी प्रकार भगवत कृपा से कुछ ही क्षणो मे विचार बदल गये एवम राज आंगन की निर्धारित जमीन पर एमभीटी का मालिकाना प्राप्त होने मे सफलता मिली। इससे यह समझ आया कि प्रभु की कृपा के क्षण का इन्तजार करना चाहिए और निराश नही होना चाहिए।

तृतीय अध्याय – स्वप्न से स्वरूप तक

रेखाओं में सपने उतरे, नक्शों में आकार मिला,
हर बैठक में एक विचार, हर विचार को प्यार मिला।
सुबह-शाम बस एक ही चर्चा — कैसा होगा यह निर्माण?
कैसे इसमें दिखे समाज का, गौरव, संस्कृति और सम्मान।
बिनोद जी का अनुभव बोला, वेद जी के श्रम ने फिर आकार लिया,
ईंट नहीं थी केवल उसमें, जीवन का उपहार दिया।
अभावों के उस अंधियारे में, दीप जलाकर चलना था,
जो समाज हेतु निकले थे, उनको कब रुकना था।

अर्थार्त

अध्यक्ष बाबूलाल अग्रवाल जी के नेतृत्व में रिजॉर्ट की रूपरेखा तैयार करने का कार्य प्रारंभ हुआ। इस कार्य में बिनोद तुलस्यान ने अपने दीर्घ अनुभव का योगदान देते हुए विभिन्न बैठकों के माध्यम से परियोजना को आकार दिया। अंततः आर्किटेक्ट axis ranchi को वास्तु एवं डिज़ाइन कार्य सौंपा गया। वेद प्रकाश केजरीवाल जी के प्रभार मे निर्माण कार्य हेतु विस्तृत परीक्षण के बाद प्रदीप देवरलिया के सहयोग से लेबर कॉन्ट्रैक्ट मॉडल को अपनाया गया और कॉन्ट्रेक्टर अनिल सिंह जी को कार्यभार सौपा गया।

चतुर्थ अध्याय – विस्तार, पहचान एवम सामाजिक गतिविधिया

भारत वर्ष के पचहत्तर वर्षों के उत्सव में, पचहत्तर दीप जलाए,
सेवा, संस्कार और समर्पण के, संदेश घर-घर पहुँचाए गये।
भूमि पूजन की पावन बेला, जन-जन का विश्वास बना,
माधवास के मधुर स्वरों से, धनबाद का इतिहास बना।
पंजीकरण, पहचान, प्रतिष्ठा — सबने नया विस्तार दिया,
समाज की इस तपोभूमि ने, भारत को उपहार दिया।
राम जन्म उत्सव से लेकर, सेवा के हर आयोजन तक,
ट्रस्ट बना परिवार सभी का, जन-जन के अभिनंदन का।

अर्थार्त

आर्थिक चुनौतियों के बावजूद नक्शा तैयार हुआ तथा आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया विभिन्न परेशानियो के बीच पूर्ण की गई। भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ट्रस्ट द्वारा 75 सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन कर एक नई मिसाल स्थापित की गई।भारत के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को एक ट्रस्ट के द्वारा आर्थिक अभाव मे भी पचहत्तर कार्यक्रम की एक प्रस्तुती भारतमाता की पचहत्तरवी स्वतंत्रता के शुभ अवसर पर प्रस्तुत करते हुए देश को सम्मान की योजना पर अर्थाभाव मे स्थगित कर दिया गया। ट्रस्ट ने इस अवधि में अनेक संस्थागत उपलब्धियाँ अर्जित कीं— आयकर अधिनियम अंतर्गत पंजीकरण,CSR पंजीकरण एमबीटी लोगो एवं नाम का संरक्षण नीति आयोग पंजीकरण ,स्वतंत्र वेबसाइट की स्थापना marwarivikashtrust.com⁠ भूमि पूजन समारोह श्री शम्भू नाथ अग्रवाल सपत्नी उर्मिला देवी के कर कमलो से तथा लगभग 5000 मारवाङी सदस्यों की सहभागिता वाले सुव्यवस्थित कृष्ण भक्ति पर आधारित सांस्कृतिक आयोजन में माधवस एंड टीम का कार्यक्रम राज आंगन मे आयोजित अपने आप मे एक मिशाल बन गया, जिसे धनबाद के सामाजिक इतिहास के सबसे भव्य आयोजनों में माना गया।

पंचम अध्याय – निर्माण और वर्तमान उपलब्धिया

फिर दायित्व की ध्वजा उठी, नेतृत्व ने विस्तार लिया,
सेवा को ही धर्म मानकर, नव युग का संचार किया।
मिट्टी बोली, पत्थर बोले, श्रम की गाथा गाने लगे,
बेसमेंट, रैम्प और दीवारें, सपनों को सजाने लगे।
निन्यानवे पिलर खड़े हुए, जैसे विश्वास अडिग खड़ा,
हर ईंट कहे — “मैं समाज हूँ”, हर पत्थर बोले — “हम बड़ा।”
पचीस करोड़ की संपदा से, बढ़कर इसकी शान यहाँ, मन, श्रम, धन और आत्मा से, बसता पूरा समाज यहाँ।

अर्थार्त

2024 की आम सभा में अध्यक्ष बाबूलाल अग्रवाल जी ने अध्यक्ष पद का दायित्व सचिव अनिल मुकीम को सौंपा। भगवत कृपा से 14.12.2024 को रिजॉर्ट निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। वर्ष 2025 में अनेक चुनौतियों के बीच समाज के दानदाताओं एवं सदस्यों के सहयोग से निर्माण कार्य निरंतर आगे बढ़ा और— लगभग 40,000 वर्गफुट बेसमेंट, दो रैम्प, 99 पिलर ,चार सीढ़ियाँ,रिटेनिंग वॉल, लिफ्ट, वाटर टैक इत्यादि का निर्माण पूर्ण किया गया और 26 जनवरी 2026 को चालीस हजार वर्ग फीट बेसमेंट यानी पार्किंग स्पेस मे बीसीसीएल के सीएमडी श्री मनोज अग्रवाल, पुलिस उपकप्तान श्र डी के बंका, पूर्व मेयर शेखर अग्रवाल एवम लगभग तीन सौ सम्मानित सदस्य की उपस्थिती को साक्षी रखकर भारत माता के झंडोत्तोलन कार्यक्रम सम्मान एवम सलामी के साथ अध्यक्ष अनिल मुकिम ने सभी का हार्दिक अभिनंदन किया। इस देश भक्ति के कार्यक्रम के साथ रिजॉर्ट के अन्तर्गत राष्ट्र के छोटे से प्रोजेक्ट को राष्ट्र के नाम समर्पित करते हुए सभी प्रफुल्लित हो गये। आज ट्रस्ट के अधीन लगभग ₹25 करोड़ की परिसंपत्तियाँ हैं तथा वर्तमान में ट्रस्ट किसी वित्तीय दायित्व से मुक्त है। यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक संकल्प, श्रम, विश्वास और समर्पण की गाथा है। “इस निर्माण में समाज के प्रत्येक सदस्य का मन, धन, श्रम और आत्मा जुड़ी हुई है। हमें विश्वास है कि यह परियोजना शीघ्र ही समाज को समर्पित होकर सामाजिक विकास और सामूहिक सुख का केंद्र बनेगी।” आओ मिलकर हाथ उठाएँ, मन में नव विश्वास भरें, “हम हैं ट्रस्ट, ट्रस्ट हमसे है”, मिलकर इसका स्वप्न सँवारें।

अंतिम पंक्तियाँ ( सामूहिक उच्चारण हेतु):
न धन मेरा, न मान मेरा,
यह समाज सम्मान मेरा।
तन, मन, श्रम, विश्वास हमारा,
मारवाड़ी विकास ट्रस्ट हमारा।।